Wednesday, 8 October 2025

आज मैं जानती हूँ कि दवा बीमारी से लड़ती है, लेकिन खाना लड़ने की ताकत देता है।

सही पोषण ने मेरा मन बचाया — और संजीवनी के ‘कैनआहार’ ने मुझे रास्ता दिखाया

जब मैंने पहली बार कैंसर शब्द सुना, तो मेरी दुनिया अंधेरी हो गई। 

मैं पहले से ही अपने परिवार को दो वक़्त का खाना खिलाने के लिए संघर्ष कर रही थी, और अब मुझे एक ऐसी बीमारी से लड़ना था जिसके बारे में मैं कुछ नहीं जानती थी। 

डॉक्टर ने कहा कि मुझे कीमोथेरैपी करवानी होगी। मुझे लगा दवाइयाँ ही मुझे ठीक कर देंगी। मुझे यह नहीं पता था कि खाना — या सही पोषण की कमी — तय करेगा कि मैं कितनी ताकत से इस बीमारी से लड़ पाऊँगी।

इलाज शुरू होने से पहले ही मेरा शरीर कमजोर हो चुका था। हमारा खाना बहुत साधारण था — थोड़ा चावल, पतली दाल, और कभी-कभी थोड़ी सी सब्ज़ी। 

जब कीमोथेरैपी शुरू हुई, तो मेरा खाने का मन ही नहीं करता था। हर चीज़ का स्वाद बदल गया था, मुँह में धातु जैसा स्वाद आता था। उल्टियाँ होती थीं, थकान रहती थी, और मन हमेशा उदास। धीरे-धीरे शरीर की ताकत खत्म होने लगी।

इसी दौरान अस्पताल में मेरी मुलाक़ात संज़ीवनी लाइफ बियॉन्ड कैंसर की टीम से हुई। वे मुस्कुराकर मेरे पास बैठे और बोले — “आप अकेली नहीं हैं। हम आपकी मदद करेंगे।” उनकी बात सुनकर मैं हैरान रह गई। मैंने सोचा, खाना कैसे दवा बन सकता है?

उन्होंने मुझे बताया कि कैंसर के इलाज के दौरान सही पोषण दवाइयों जितना ही ज़रूरी है। 

उन्होंने मुझे महंगी चीज़ों की नहीं, बल्कि हमारी रसोई में मिलने वाली साधारण चीज़ों की बात की — भूने चने से प्रोटीन, केले से ऊर्जा, दही से पाचन में मदद, और गुड़ से ताकत। 

उन्होंने मुझे समझाया कि चावल के माड़ को कैसे पौष्टिक बनाया जा सकता है, बार-बार थोड़ा-थोड़ा खाना क्यों ज़रूरी है, और पानी या तरल पदार्थ पीना कितना आवश्यक है।

धीरे-धीरे मैंने उनकी सलाह माननी शुरू की। कुछ ही हफ्तों में मेरे शरीर में बदलाव दिखने लगा। थकान कुछ कम हुई, भूख थोड़ी लौटी, और सबसे बड़ी बात — मन में उम्मीद फिर से जागी।

हर बार जब मैं अपनी कीमोथेरैपी साइकिल के लिए अस्पताल आती हूँ, तो संज़ीवनी की टीम मुझे एक “कैनआहार किट” देती है। 

इस किट में वे सभी पौष्टिक चीज़ें होती हैं जो मेरे शरीर को ताकत देती हैं। 

हर विज़िट पर मेरा वजन, हीमोग्लोबिन और अन्य ज़रूरी वीटल पारामेटर भी मॉनिटर किये जाते हैं ताकि पता चल सके कि मेरा शरीर कितना संभल रहा है और पोषण का असर कैसा है। 

यह देखभाल देखकर मुझे लगता है कि कोई सचमुच मेरी परवाह करता है।

कैनआहार की टीम बार-बार मुझे यह एहसास कराते थे कि मैं इस बीमारी से जीत सकती हूँ। उन्होंने मुझे बताया — “खाना भी दवा है।”

उनका स्नेह और देखभाल मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं था। मैं, जो कभी भूखी और निराश होकर अस्पताल आई थी, अब महसूस करने लगी थी कि मेरा शरीर फिर से लड़ने को तैयार है।

आज मैं जानती हूँ कि दवा बीमारी से लड़ती है, लेकिन खाना लड़ने की ताकत देता है।

और मेरे जैसे गरीब, कमजोर, और डरे हुए मरीजों के लिए, संज़ीवनी का कैनआहार सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है — यह जीवन की डोर है।

यह केवल शरीर को भोजन नहीं देता, बल्कि आत्मा को भी सहारा देता है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्चा उपचार तभी शुरू होता है जब कोई आपके लिए दिल से परवाह करता है — जैसे Sanjeevani .

(As narated to me by a CanAhaar beneficiary at Sanjeevani support group meeting held recently - Name and pic masked on her request) 

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