Wednesday, 8 October 2025

Thank you Satori — जिसने मुझे भय से विश्वास, और निराशा से नवजीवन की ओर पहुँचाया।

सतोरी – मेरे जीवन की नई सुबह

मैं चंडीगढ़ की रहने वाली हूँ। 

कुछ साल पहले जब डॉक्टर ने कहा कि मुझे कैंसर है, तो ऐसा लगा जैसे किसी ने ज़मीन खींच ली हो। 

जीवन अचानक डर, कीमोथेरेपी, दवाइयों और अस्पतालों में सिमट गया। 

शरीर कमजोर पड़ता गया, बाल झड़ गए, चेहरा आईने में अजनबी लगने लगा।

लेकिन सबसे ज़्यादा जो टूटा, वह मेरा मन था।

एक दिन अस्पताल में Sanjeevani Life Beyond Cancer की एक काउंसलर, मुझसे मिलीं। उन्होंने बहुत प्यार से कहा,

“दीदी, कैंसर सिर्फ शरीर की नहीं, मन की भी लड़ाई है। हमारे Satori प्रोग्राम में आइए — आप खुद को फिर से पाएँगी।”

मैंने हिचकिचाते हुए इस पाँच दिन के Satori Online Workshop में हिस्सा लिया, और सच कहूँ, वही मेरे जीवन का मोड़ बन गया।

पहले दिन ध्यान और आत्मचिंतन से शुरुआत हुई। हमें सिखाया गया कि डर को भागाकर नहीं, पहचानकर हराया जा सकता है।

दूसरे दिन हमने भावनाओं से जुड़ना सीखा — अपने अंदर के दर्द, गुस्से और आँसुओं को स्वीकार करना।

तीसरे दिन का विषय था पोषण और स्वास्थ्य, जिसमें बताया गया कि कीमो के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।

हर चक्र में मेरा वजन, हीमोग्लोबिन और पोषण स्तर जाँचा जाता है, जिससे मुझे अपनी प्रगति देखने का आत्मविश्वास मिलता है।

चौथे दिन योग, श्वास और ध्यान के माध्यम से शरीर और आत्मा को जोड़ा गया।

और पाँचवे दिन जब ‘कृतज्ञता’ का सत्र हुआ, तो मैं खुद को रोक नहीं पाई — आँसू बहते रहे, पर इस बार ये आँसू डर के नहीं, सुकून के थे।

आज मैं कह सकती हूँ कि Satori ने मुझे फिर से जीना सिखाया।

अब मैं सिर्फ़ कैंसर सर्वाइवर नहीं, एक नई सोच और नई रोशनी से भरी इंसान हूँ।

हर सुबह सूरज की किरणों को देखकर मन में एक ही भावना उठती है —
 
“धन्यवाद Satori, तूने मुझे नया जन्म दिया।”

Thank you Satori — जिसने मुझे भय से विश्वास, और निराशा से नवजीवन की ओर पहुँचाया।

(As narrated by a Beneficiary on the final day of the program - Name and picture masked) 

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